Friday, March 13, 2009

Third Front का आगाज

तुमकुर (कर्नाटक), जासं/एजेंसियां : राष्ट्रीय राजनीति के तीसरे ध्रुव के तौर पर गुरुवार को Third Front फिर अस्तित्व में आ गया। कर्नाटक के तुमकुर जिले में मोर्चे के गठन की औपचारिक घोषणा की गयी। वाम दलों, तेदेपा व जद (एस) समेत कुल आठ दलों के इस तीसरे मोर्चे की रैली में सभी घटक दलों के नेता उपस्थित थे। रैली में अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता तथा बसपा सुप्रीमो मायावती खुद तो नहीं थी, मगर दोनों ने ही अपने प्रमुख नेताओं को भेजकर तीसरे मोर्चे के प्रति समर्थन जताया। बीएसपी के जुड़ने से अब तीसरा मोर्चा अब कमजोर भाजपा और कांग्रेस गठबंधन के मुकाबले मजबूत विकल्प दिखाई देने लगा है। बीएसपी प्रधानमंत्री की दावेदारी से कम पर मानने को तैयार नही है।
अब 15 मार्च को मोर्चे के नेताओं की दिल्ली में मायावती के आवास पर बैठक होगी, जिसमें लोकसभा चुनाव की रणनीति तय की जायेगी। तीसरे मोर्चे के मुख्य संयोजक जद (एस) प्रमुख एच.डी. देवेगौड़ा ने इस अवसर पर कहा कि देश की दो धु्रवीय होती राजनीति में जनता को नया विकल्प देने के लिए ये तीसरा मोर्चा गठित किया गया है। उन्होंने कहा कि मोर्चे में शामिल दल देश में सत्ता के विकेंद्रीकरण के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने मोर्चे को बसपा का समर्थन होने का दावा करते हुए कहा कि मायावती शायद सीटों में भागीदारी न रखें, मगर वे मोर्चे को पूरा समर्थन देंगी।
फिलहाल मोर्चे में आठ दल माकपा, भाकपा, आरएसपी, फारवर्ड ब्लाक, तेदेपा, टीआरएस, जद (एस) व हरियाणा जनहित कांग्रेस शामिल हैं। लेफ्ट फ्रंट को उम्मीद है कि उड़ीसा में भाजपा से संबंध तोड़ चुका बीजद भी मोर्चे में शामिल होगा। मोर्चे की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की अभी कोई घोषणा नहीं की गई है। माना जा रहा है कि इस संबंध में भी घटक दल 15 मार्च की बैठक में ही फैसला करेंगे।

"It is the aim of the BSP to make Mayawati prime minister."
BSP's General Secretary Satish Chandra Mishra at third front rally in Karnatak.

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